बादलों के प्रकार : Types of clouds

बादलों के प्रकार – Types of clouds in hindi : वायुमंडल की संरचना में बादल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वायुमंडल में विभिन्न ऊंचाइयों पर जलवाष्प के संघनन के फलस्वरूप निर्मित जल तथा हिम कणों को मेघ अथवा बादल करते हैं।
बादल कोहरे का भी विशालतम रूप होते है। ये धरातल से काफी ऊंचाई पर विकसित होते हैं। उष्ण तथा आद्र वायु जब वायुमंडल में ऊपर की तरफ उठता है तो तेजी से ठंडा होता है। इस क्रिया को संघनन कहा जाता है। संघनन के उपरांत जलवाष्प जल कण या हिम कण के रूप में बदल जाता है। यही कण धरातल से बादल के रूप में दिखाई देते हैं।

धरातल से ऊँचाई के आधार पर मेघों ( बादलों के प्रकार ) को चार वगों में विभक्त किया जाता है:-

(i) उच्च मेघ,
(ii) मध्य मेघ,
(iii) निम्न मेघ,
(iv) ऊर्ध्वाधर विकासवाले मेघ ।

बादलों के प्रकार : Types of clouds in hindi

(i) पक्षाभ मेघ

(ii) स्तरी,

(iii) कपासी,

(iv) वर्षांकारी मेघ

आकाश में प्राय: कई प्रकार के मेघ मिश्रित रूपों में पाए जाते हैं । इसलिए अन्तर्राष्ट्रीय ऋतु विज्ञान परिषद
के द्वारा मेघों को उपप्रकारों में विभक्त किया गया है, जो निम्नांकित हैं :- बादलों के प्रकार

(i) उच्च मेघ (धरातल से औसत ऊँचाई 5-13 किलोमीटर)

(a) पक्षाभ मेघ (Cirrus clouds),
(b) पक्षाभ स्तरी मेघ (Cirro-stratus clouds),
(c) पक्षाभ कपासी मेघ (Cirro-cumulus clouds)

(ii) मध्य मेघ (धरातल से औसत ऊँचाई 2-7 किलोमीटर)

(d) स्तरी मेघ (Alto-stratus clouds),
(e) कपासी मध्य मेघ (Alto-cumulus clouds)

(iii) निम्न मेघ (धरातल से औसत ऊँचाई 0-2 किलोमीटर)

(f) स्तरी कपासी मेघ (Strato-cumulus clouds),
(g) स्तरी मेघ (Stratus clouds),
(h) वर्षा स्तरी मेघ (Nimbostratus clouds)

(iv) उध्ध्वाधर विकासवाले मेघ (आधार से शीर्ष तक की ऊँचाई 18 किलोमीटर अथवा अधिक)

(i) कपासी मेघ (Cumulus clouds)]
(j) कपासी-वर्षी मेघ (cumulonimbus clouds)।

 ऊँचाई, आकार, प्रकाश के परावर्तन तथा रंग के आधार पर (मेघों) बादलों के प्रकार (Types of clouds):-

(1) पक्षाभ मेघ (Cirrus clouds)

पक्षाभ मेघ वायुमंडल में सबसे ऊँचाई पर पाये जाते है। इन मेघों की संरचना हिम के कणों से होती है । धरातल से दिन में ये मेघ पंख की तरह रेशों के समान दिखाइ देते हैं। जब ये आकाश में अस्तव्यस्त बिखरे रहते हैं तब इनसे स्वच्छ मौसम रहने की सूचना मिलती है । किन्तु जब ये क्रम से पक्षाभ स्तरी अथवा स्तरी मेघों के साथ दिखाई देते हैं, तब मौसम के खराब होने की संभावना जताई जाती है । चक्रवात के आने से पहले पक्षाभ मेघ दिखाई देते हैं ।

(2) पक्षाभ-स्तरी मेघ (Cirrus clouds)

सफेद चादर की तरह सम्पूर्ण आकाश में छाये रहने के कारण आकाश दूधिया रंग का दिखाई देता है । पक्षाभ सतरी मेघों से दिन में सूर्य तथा रात में चन्द्रमा के चारों तरफ प्रभा-मण्डल बन जाता है । ये मेघ चक्रवात की सूचना देते हैं।

(3) पक्षाभ-कपासी मेघ (Cirrus clouds)

ऐसे बादल पंक्तियों अथवा समूहों में पाए जाते हैं । ये
छोटी-छोटी गोलाकार राशियों के रूप में रहते हैं । इनसे छाया नही बनती हैं । इन्हें mackerel sky भी कहते है।

(4) स्तरीमध्य मेघ (Alto-stratus clouds)

ये मेघ भूरे या नीले रंग के मोटी परत के रूप में पूरे आकाश में छा जाता है। ये देखने में धारीदार होते हैं । ये  प्रभामण्डल का निर्माण नही कर पाते है। इनसे आकाश आंशिक या पूर्णरूप से मेघ से ढक जाता है। इनसे लगातार वृष्टि होने की सम्भावना रहती है।

(5) कपासी मध्य मेघ (Alto-cumulus clouds)

ये मेघ भूरे या कुछ सफेद होते हैं। इनमे परतें पायी जाती है। ये लहरों के रूप में  बिखरे रहते है। ये मेघ छायादार होते
है। इनका विकास ऊपर की ओर होता है। संवहन- तरंगों या पर्वत के ढाल के सहारे ऊपर चढ़ने से वायु-धाराओं में कपासी मध्य मेघ का निर्माण हो जाता हैं । ऐसे मेघ को पताका मेघ भी कहते हैं।

(6) स्तरी कपासी मेघ (Strato-cumulus clouds)

ये मेघ गोलाकार राशियों से निर्मित होते है। इनको मेघों की निचली भूरी परतों जे वर्ग में रखा जाता हैं। ये समूहों या लहरों के रूप में दिखाई देते हैं। इन मेघों की ऊँचाई औसतन 2500-3000 मीटर होती है।

(7) स्तरी मेघ (Strato clouds)

ये निम्न प्रकार के मेघों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये आकाश को कोहरे की भाँति ढँक लेते हैं। कोहरे की निचली परतों के विसरण अथवा उत्थान के कारण इनका निर्माण होता है। इनका विकास नीचे से ऊपर की तरफ होता है। इनके बिखरने से आकाश नीला दिखाई देता है। इन खंडित मेघों को Fractostratus कहते है । इन मेघों का निर्माण प्रायः दो विपरीत स्वभाव वाली पवनों के मिलने से शीतोष्ण कटिबँधीय क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में होता है।

(8) वर्षा-स्तरी मेघ (Cirrus clouds)

ये मेघ निचले स्तर के मेघ होते है। ये भूरे तथा गहरे रंग के  अविच्छिन्न मेघ है।  इनसे जल तथा हिम वर्षा लगातार होती है। इनसे शीतोष्ण कटिवन्धीय चक्रवातों में उष्ण वाताग्र के साथ वर्षा-स्तरी मेघ बनते हैं ।

(9) कपासी मेघ (Cumulus clouds)

कपासी मेघ घने तथा विस्तृत रूप में फैले होते हैं। ये सम्पूर्ण आकाश में धुनी हुई रुई के समान प्रतीत होते हैं।ये ऊर्ध्वाधर विकास के कारण आकाश में गुम्बदाकार या फूलगोभी के रूप में दिखाई पड़ते हैं। इनका आधार काले रंग का क्षैतिज रूप में दूर तक फैला होता हैं। सूर्य के प्रकाश में ये चमकीले दिखाई पड़ते हैं। कपासी मेघ अत्यधिक घने आकार के होते हैं। इनसे मौसम के साफ रहने का आभास होता है।

(10) कपासी-वर्षी मेघ (Cumulonimbus clouds)

इन मेघों का रंग गहरा तथा आकृति ऊर्ध्वाधर होती है  इनके शीर्ष भाग पर्वत के समान गुम्बदाकार रूप में होते हैं। इनकी ऊँंचाई आकाश में औसतन 18 किलोमीटर तक होती है। इन मेघों से तेज बौछार के साथ वर्षा होती है। उपल-वृष्टि और तेज झंझावात इनके प्रमुख पहचान है। ये  मेघ देखने में वर्षा-स्तरी जैसे दिखाई पड़ते हैं। इन मेघों से भयंकर गर्जन तथा बिजली की चमक के साथ वर्षा होती है। वर्षा होने के बाद मौसम साफ तथा स्वच्छ हो जाता है।

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