ज्वालामुखी के प्रकार , वितरण : Types of Volcano, Distribution

 ज्वालामुखी के प्रकार Types of Volcano :- ज्वालामुखी बहिर्जात शक्तियों द्वारा उत्पन्न होता है। यह एक प्राकृतिक घटना है। इसके द्वारा पृथ्वी के आंतरिक भाग से तप्त मैग्मा या लावा धरातल पर प्रकट होता है। ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाले पदार्थ ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्था में पाए जाते हैं। इसमें से निकलने वाली गैसों में 80 से 90% भाग जलवाष्प का होता है। कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि अन्य गैस मुख्य हैं। ज्वालामुखी का संबंध एक गोलाकार कीप जैसी रचना से होता है जो पृथ्वी के आंतरिक भाग से जुड़ा होता है। जिसके द्वारा तप्त मैग्मा, गैस, जलवाष्प के अलावा चट्टान के टुकड़े आदि पदार्थ धरातल पर विस्फोट के साथ बाहर निकलते है ।

ज्वालामुखी के प्रकार

लावा मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:-

सिलिका प्रधान लावा।

यह गाढ़ा और चिपचिपा होता है। इसमें सिलिका की मात्रा 75% तक होती है। यह लावा गाढ़ा होने के कारण तेजी से जमता है। जिससे पर्वतों का निर्माण होता है।

अम्लीय लावा।

इसमें सिलिका की मात्रा कम होती है। पतला होने के कारण या दूर तक फैल जाता है। जिससे पठार का निर्माण होता है।

ज्वालामुखी के प्रकार

  1. ज्वालामुखी से निकलने वाले ठोस टुकड़ों को पयारॉक्लास्ट कहा जाता है।
  2. जब लावा का आकार छोटे कांच की गोलियों की तरह होता है तो उसे लैपली कहते है। इससे छोटे टुकड़ों को स्कोरिया कहा जाता है।
  3. लावा के झाग से बनने वाले चट्टान को प्युमिस कहते है।

उद्भेदन के आधार पर ज्वालामुखी के प्रकार Types of Volcano

विस्फोटक अथवा केंद्रीय उद्भेदन

ऐसा उद्भेदन एक सकरी नली या द्रोणी के सहारे होता है। इसमें लावा भयंकर आवाज के साथ अत्यधिक तीव्रता से बाहर निकलता है। यह ज्वालामुखी प्रकार अत्याधिक विनाशकारी होता है। इसके द्वारा भयंकर भूकंप की उत्पत्ति होती है।

केंद्रीय उद्भेदन के आधार पर ज्वालामुखी के प्रकार : Types of Volcano

हवाई तुल्य ज्वालामुखी

यह एक शांत प्रकार का उद्भेदन है। इसमें लावा पतला होता है। यह आसपास के क्षेत्र में फैल जाता है। इसमें कभी-कभी गैसों के साथ लावा के फव्वारे निकलते हैं। यह मुख्य रूप से हवाई द्वीप में देखने को मिलता है। अतः इसे हवाई तुली ज्वालामुखी भी कहा जाता है।

स्ट्रांबोली तुल्य ज्वालामुखी

इस प्रकार के ज्वालामुखी का उद्भेदन समय अंतराल पर होता रहता है। इसमें लावा कम तरल होता है। इसमें लावा तथा गैस रुक रुक कर लगातार निकलता रहता हैं। लावा के कण हवा में उड़कर बम तथा विखंडित पदार्थ के रूप में वापस गिरते हैं। भूमध्य सागर में सिसली द्वीप के उत्तर में स्थित लिपरी के स्ट्रांबोली ज्वालामुखी से निरंतर लावा और गैस निकलता रहता है। जिसके कारण इसे भूमध्य सागर का प्रकाश स्तम्भ कहा जाता है।

वल्कैनियन तुल्य ज्वालामुखी

यह ज्वालामुखी का एक विस्फोटक प्रकार है। जिसमें गैस और लावा बहुत तेजी से बाहर निकलते हैं। इसमें लावा गाढ़ा होता है तथा जल्दी जम जाता है। इससे निकले गैसों से आकाश में फूलगोभी जैसी आकृति बन जाती है। लीपारी द्वीप पर स्थित वल्कानो नामक ज्वालामुखी के आधार पर इसका नामकरण वल्कैनियन ज्वालामुखी रखा गया है।

पीलीयन तुल्य ज्वालामुखी

यह विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली एवं विस्फोटक प्रकार का ज्वालामुखी है। इसका मैग्मा अत्यंत गाढ़ा होता है। इस ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा में विखंडित पदार्थ सम्मिलित होते हैं। 1902 में सेंट पियरे नामक नगर इसी प्रकार के ज्वालामुखी विस्फोट से बर्बाद हो गया था। इसी प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार से 1883 में सुंडा में भयानक भूकंप आया था जिससे समुद्र में 120 फीट ऊंची लहरें उठी थी।

विसुवियस प्रकार का ज्वालामुखी

यह ज्वालामुखी भयानक विस्फोट के साथ प्रकट होता है। लावा के साथ गैसों का सम्मिश्रण होने के कारण यह अधिक भयानक प्रतीत होता है। सबसे पहले प्लिनी ने इस ज्वालामुखी का वर्णन किया था जिसके कारण इसे प्लिनियन प्रकार का ज्वालामुखी भी कहते हैं।

दरारी उद्भेदन वाले ज्वालामुखी :- ज्वालामुखी के प्रकार

इस प्रकार के ज्वालामुखी में लावा धरातल के मध्य दरारों से बिना विस्फोट के शांतिपूर्वक निकलकर फैल जाता है। इसमें गैस और विखंडित पदार्थ की मात्रा ना के बराबर होती हैं। लावा प्रायः पतला होने के कारण फैल कर पठार का निर्माण करता है। भारत का दक्कन का पठार तथा कोलंबिया का पठार दरारी उद्भेदन के परिणाम स्वरुप ही निर्मित हुआ है।

उद्गार की अवधि के आधार पर ज्वालामुखी के प्रकार : Types of Volcano

सक्रिय ज्वालामुखी

इस प्रकार के ज्वालामुखी से सामान्यतः लावा, विभिन्न प्रकार की गैस, जलवाष्प, धूल, राख एवं धुआ निकलता रहता है।ऐसे ज्वालामुखी वर्षों तक क्रियाशील रहते है। वर्तमान समय में विश्व में इस प्रकार के 500 से अधिक ज्वालामुखी हैं। इटली का एटना एंव स्ट्रांबोली, हवाई दीप का मोनालोवा आदि सक्रिय ज्वालामुखी है। दक्षिण अमेरिका का कोटोपैक्सी विश्व का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी है। जिसकी ऊंचाई 5879 मी. है।

प्रसुप्त ज्वालामुखी

यह ज्वालामुखी लंबे समय तक शांत रहते हैं, किंतु अचानक कभी भी सक्रिय हो जाते हैं। जिससे अपार जनधन की हानि होती है। उदाहरण स्वरुप इटली का विसुवियस ज्वालामुखी, इंडोनेशिया का क्राकातोआ तथा जापान का फ्यूजीयामा प्रसुप्त ज्वालामुखी के उदाहरण हैं।

मृत ज्वालामुखी

ऐसे ज्वालामुखी को शांत ज्वालामुखी भी कहा जाता है। इस प्रकार के ज्वालामुखी से लंबे समय से कोई उद्गार नहीं हुआ रहता है। म्यांमार का माउंट पोपा, अफ्रीका का किलिमंजारो, ईरान का कोह सुल्तान एवं देमवंद मृत ज्वालामुखी का उदाहरण है।

ज्वालामुखी से बने स्थलाकृतिया।

ज्वालामुखी उद्गार के समय जो पदार्थ भू गर्भ से बाहर निकलते हैं, उससे धरातल पर विभिन्न प्रकार की आकृतियों का निर्माण होता है। जी निम्न है:-

सिंडर शंकु

इस प्रकार के शंकुओ में शिलाखंड और राख की प्रधानता होती है। इसमें मुख्य रूप से धूल, राख और विखंडित पदार्थ आदि सम्मिलित होते हैं। इसका ढाल अवतल होता है। सिसली और हवाई द्वीप पर बने शंकु इसके प्रमुख उदाहरण है।

मिश्रित शंकु

शांत ज्वालामुखी के उद्भेदन से लावा, विखंडित पदार्थ इत्यादि की एक के बाद एक तह बन जाने के कारण मिश्रित शंकु का निर्माण होता है। विश्व के अधिकांश ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत इसी प्रकार के हैं। इटली का विसुबियस, सिसली का एटना, जापान का फ्यूजीयामा आदि मिश्रित शंकु वाले ज्वालामुखी है।

शिल्ड शंकु

बेसाल्टिक लावा के निक्षेप से शिल्ड शंकु का निर्माण होता है। इसमें लावा काफी पतला होता है जो दूर तक फैल कर जमता है। हवाई दीप पर स्थित मोनालोवा शिल्ड शंकु का उदाहरण है।

परपोषित शंकु

इसमें ज्वालामुखी के मुख्य नली से कई छोटी-छोटी नदियां निकलती हैं। जिससे कई छोटे-छोटे शंकुओ का निर्माण होता है। इस प्रकार के शंकुओ को परजीवी शंकु कहते हैं।

क्रेटर

ज्वालामुखी विस्फोट से ज्वालामुखी के मुख पर बनने वाले कीप की आकृति जैसी रचना क्रेटर कहलाती है। यह एक वृत्ताकार गड्ढा होता है।

कोल्डरा

कोल्डरा क्रेटर का ही विस्तृत रूप होता है। जब भयानक विस्फोट से शंकु के ऊपरी भाग में फैलाव हो जाता है तो इस विशाल रचना का निर्माण करता है। कभी-कभी इसमें जल भर जाता है जिसे कोल्डरा झील कहते हैं।

ज्वालामुखी का विश्व वितरण।

ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप को छोड़कर लगभग विश्व के सभी महाद्वीपों पर ज्वालामुखी पाए जाते हैं। विश्व के लगभग दो-तिहाई ज्वालामुखी प्रशांत महासागर के किनारे स्थित है तथा बाकी मोड़दार पर्वतों के क्षेत्र में तथा गहरे सागरीय भ्रंश घाटी में अवस्थित है।

परी प्रशांत मेखला

यह पेटी प्रशांत महासागर के चारों तरफ विस्तृत है। या दक्षिण अमेरिका के एंडीज श्रृंखला से प्रारंभ होकर मध्य अमेरिका, मैक्सिको, पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका, अलास्का से होते हुए जापान फिलिपींस तथा इंडोनेशिया तक फैला हुआ।

मध्य महाद्वीपीय पेटी

यह महाद्वीपीय प्लेट अभिसरण क्षेत्र में स्थित है।

अफ्रीका का भ्रंश घाटी क्षेत्र

माउंट कीनिया और किलिमंजारो इस क्षेत्र के मुख्य ज्वालामुखी है।

मध्य अटलांटिक मेखला

यह मेखला अटलांटिक महासागर के मध्य दो अपसरण प्लेट पे स्थित है। आइसलैंड, एजोस, सेंट हेलेना यांह के प्रमुख ज्वालामुखी द्वीप है।

भूमध्यसागरीय पेटी

पश्चिमी दीप समूह की पेटी

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